MP Current Affair 30th July 2019

ललित कलाओं के लिये पुरस्कृत होंगे प्रदेश के 10 कलाकार

संस्कृति विभाग के अंतर्गत उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी ने वर्ष 2018-19 के लिये ललित कलाओं में 10 मूर्धन्य कलाकारों को पुरस्कृत करने का फैसला लिया है। प्रत्येक कलाकार को 51 हजार रुपये की राशि प्रदान की जायेगी। अकादमी द्वारा विभिन्न ललित कलाओं जैसे मूर्ति शिल्प, पेंटिंग, ग्राफिक्स और ड्राइंग के लिये कलाकारों की कलाकृतियों का चयन किया गया है। सुश्री निधि चौपड़ा, भोपाल को देवकृष्ण जटाशंकर जोशी पुरस्कार, शम्मी विश्वकर्मा, ग्वालियर को मुकुन्द सखाराम भाण्ड पुरस्कार, अंशु पचोली, देवास को सैयद हैदर रजा पुरस्कार, सुभाष पोयाम, भोपाल को दत्तात्रेय दामोदर देवलालीकरण पुरस्कार, भारत कुमार जैन, विदिशा को जगदीश स्वामीनाथन पुरस्कार, मनीषा अग्रवाल, इंदौर को विष्णु चिंचालकर पुरस्कार, गुंजन लड्डा, इंदौर को नारायण श्रीधर बेन्द्रे पुरस्कार, सुषमा सिटोके, भोपाल को रघुनाथ कृष्णराव फड़के पुरस्कार, सुचिता ए. मनाले, भोपाल को राममनोहर सिन्हा पुरस्कार और शालिनी आनंद, भोपाल को लक्ष्मीसिंह राजपूत पुरस्कार प्रदान किया जायेगा। जबलपुर में 12 से 14 अक्टूबर तक संवाद एवं प्रदर्शनी के अवसर पर पुरस्कृत कलाकारों की कलाकृतियाँ प्रदर्शित की जायेंगी।

स्मार्ट गौ-शालाएँ बनाने पशुपालन विभाग और एसआईबीसीएस कम्पनी के बीच एमओयू

पशुपालन मंत्री श्री लाखन सिंह यादव और जनसम्पर्क मंत्री श्री पी.सी. शर्मा की उपस्थिति में मंत्रालय में पशुपालन विभाग और एसआईबीसीएस ग्रीन पावर प्रायवेट लिमिटेड के बीच स्मार्ट गौ-शालाएँ बनाने के लिये एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। एमओयू के तहत पशुपालन विभाग द्वारा कॉर्पोरेट के सहयोग से स्मार्ट गौ-शालाओं की स्थापना की कार्य-योजना का क्रियान्वयन किया जायेगा। पहले चरण में एसआईबीसीएस कम्पनी कम से कम 2 से 3 हजार गौ-वंश की क्षमता वाली 60 गौ-शालाओं की स्थापना करेगी। स्मार्ट गौ-शाला प्रोजेक्ट में गोबर और गौ-मूत्र से जैविक सीएनजी, सौर ऊर्जा, जैविक कीट-नाशक सहित औषधियों एवं अन्य उत्पादों के माध्यम से गौ-शालाओं का व्यावसायिक मॉडल भी बनाया जायेगा। राज्य की गौ-शालाओं को जमीन देने की नीति के तहत स्मार्ट गौ-शालाओं को जमीन उपलब्ध करवाई जायेगी। गौ-शालाओं में निराश्रित गौ-वंश को रखा जायेगा।

राष्ट्रीय उद्यानों के प्रभावी प्रबंधन में मध्यप्रदेश शीर्ष पर

मध्यप्रदेश ने टाइगर राज्य का दर्जा हासिल करने के साथ ही राष्ट्रीय उद्यानों और संरक्षित क्षेत्रों के प्रभावी प्रबंधन में भी देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। भारत सरकार द्वारा जारी टाइगर रिज़र्व के प्रबंधन की प्रभावशीलता मूल्यांकन 2018 की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व ने देश में सर्वोच्च रैंक हासिल की है। बांधवगढ़, कान्हा, संजय और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन वाला टाइगर रिजर्व माना गया है। इन राष्ट्रीय उद्यानों में अनुपम प्रबंधन योजनाओं और नवाचारों को अपनाया गया है। टाइगर रिजर्व की प्रबंधन शक्तियों का आकलन कई मापदण्डों पर होता है जैसे योजना, निगरानी, सतर्कता, निगरानी स्टाफिंग पैटर्न, उनका प्रशिक्षण, मानव-वन्य जीव संघर्ष प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी, संरक्षण, सुरक्षा और अवैध शिकार निरोधी उपाय आदि।

“किंग्डम ऑफ टाइगर्स’ कार्यक्रम का आयोजन

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर मिंटो हॉल में वन विभाग की ओर से “किंग्डम ऑफ टाइगर्स’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इसमें बाघों पर केंद्रित फोटो प्रदर्शनी लगाई गई। इस प्रदर्शनी में देश के विभिन्न वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर्स की 79 फोटोग्राफ्स को प्रदर्शित किया गया है।

July 30, 2019

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