भारत का राष्ट्रीय ध्वज

हर देश का अपना एक राष्ट्रीय ध्वज होता है, जो कि उसके विकास एवं इतिहास की कहानी को स्पष्ट करता है। यह हमारे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है  

  • भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झंडा है ,मूलतः यह तीन एक सामान क्षैतिज पट्टियों से मिलकर बना है इसमें सबसे ऊपर गहरा केसरिया रंग,  बीच में सफेद और सबसे नीचे हरा रंग है।
  • सबसे उपर गहरा केसरिया रंग की पट्टी देश की ताकत और साहस को का प्रतीक है।
  • बीच में स्थित सफेद रंग की पट्टी शांति और सत्य का प्रतीक है।
  • हरा रंग देश का शुभसूचक है एवं , विकास और उर्वरता का प्रतीक है।
  • सफेद पट्टी के ठीक बीच में नीले रंग का धर्म चक्रहै,इस चक्र को प्रदर्शित करने का आशय यह है कि जीवन गति‍शील है और रुकने का अर्थ मृत्‍यु है।
  • नीले रंग का यह चक्र अशोक चक्र है ।
  • अशोक चक्र प्रारूप सारनाथ स्थित सम्राट अशोक के सिंह स्तंभ पर बने चक्र से लिया गया है। इसका व्यास सफेद पट्टी की चौड़ाई के लगभग बराबर है ।
  • अशोक चक्र में एक समान 24  तीलियां हैं।
  • राष्ट्रीय ध्वज की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 है।
  • राष्ट्रीय ध्वज को श्री पिंगली वेंकैया ने बनाया ।
  • भारत की संविधान निर्मात्री सभा ने राष्ट्रीय ध्वज का प्रारूप 22 जुलाई 1947 को अपनाया।
  • वर्तमान स्‍वरूप का पूर्वज , केसरिया, सफेद और मध्‍य में गांधी जी के चलते हुए चरखे के साथ था। यह 1931 में अपनाया गया इसे 1921 में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की बैठक में एक युवक ने गाँधी जी को दिया था ।
  • राष्ट्रीय झंडा निर्दिष्टीकरण के अनुसार झंडा खादी के कपडे  में ही बनना चाहिए। यह एक विशेष प्रकार से हाथ से काते गए कपड़े से बनता है  ।
  • नवीन जिंदल द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका के बाद भारतीय झंडा संहिता में 26 जनवरी 2002  को संशोधन किए गए जिसमें आम जनता को वर्ष के सभी दिनों में झंडा फहराने की अनुमति दी गयी और ध्वज की गरिमा, सम्मान की रक्षा करने को कहा गया।
  • “ झंडा संहिता- भारत ” के स्थान पर “ भारतीय झंडा संहिता, 2002 ” को 26 जनवरी 2002 से लागु किया गया है।
  • राष्ट्रीय ध्वज को किसी सार्वजानिक सभा में फहराते वक़्त उसे हमेशा प्रेक्षक अर्थात देखने वाले के बायीं ओर एवं वक्ता के दायीं ओर फहराना चाहिए ।
  •  अन्य देशों के ध्वजों के साथ फहराए जाने पर हमारे राष्ट्रीय ध्वज को अन्य ध्वजों के सबसे दाईं ओर (प्रेक्षकों के लिए बाईं ओर) होना चाहिए।
  •  भारत का राष्ट्रीय ध्वज हमेशा सबसे पहले फहराया जाना चाहिए और सबसे बाद में उतारा जाना चाहिए।
  • झंडे को अँधेरे में नहीं फहराया जाना चाहिए इसे सायं काल में सम्मान के साथ उतार लेना चाहिए ।
  • किसी भी अन्‍य ध्‍वज या ध्‍वज पट्ट को हमारे ध्‍वज से ऊंचे स्‍थान पर लगाया नहीं जा सकता है।
  •  झंडा केवल और केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका रहता है।
  • ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ हमारा झंडा गीत या ध्वज गीत है ।
  • भारत के झंडा गीत की रचना श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद‘ ने की थी ।
  • सबसे बड़ा झंडा फरीदाबाद में फहराया गया इसका वजन 48 किलो और आकार 96×64 फीट , ये 75 मीटर की ऊंचाई पर फहराया गया ।
  • यदि झंडा क्षतिग्रस्त है या मैला हो गया है तो उसे अलग या निरादरपूर्ण ढंग से नहीं रखना चाहिए, झंडे की गरिमा के अनुरूप विसर्जित / नष्ट कर देना चाहिए।
  •  क्षतिग्रस्त तिरंगे को नष्ट करने का सबसे अच्छा तरीका है, उसका गंगा में विसर्जन करना या उचित सम्मान के साथ दफना देना ।
  •  क्षतिग्रस्त ध्वज की समापन प्रक्रिया सार्वजानिक रूप से नहीं की जा सकती इसे एकांत में एवं उचित सम्मान के साथ ही करना चाहिए । (अधिक जानकारी के लिए ध्वज संहिता देखें –www.mha.gov.in/pdfs_hin/Jhanda-Hindi.pdf )