भारत का राष्ट्रीय गीत -‘ वन्दे मातरम् ‘

भारत का राष्ट्रीय गीत -' वन्दे मातरम् '

भारत गणराज्य का राष्ट्रगीत वन्दे मातरम्  कोई सामान्य गीत न होकर आजादी का गीत एवं क्रांति का नारा है स्वाधीनता संग्राम में लोगों को राष्ट्रवाद की प्रेरणा से ओतप्रोत करते इस गीत का इतिहास बेहद गौरवपूर्ण रहा है  –


वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलाम्
मलयजशीतलाम्
शस्यश्यामलाम्
मातरम्।

शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीम्
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीम्
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्
सुखदां वरदां मातरम्॥

  • बंकिम चन्‍द्र चटर्जी  (बंगाली साहित्यकार) द्वारा रचित ‘वन्दे मातरम्’  ही भारत का राष्ट्रगीत है ।
  • वन्दे मातरम्’  को संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को भारत का राष्ट्रगीत स्वीकार किया ।
  • 1896 में रवीन्द्र नाथ टैगोर ने पहली बार ‘वन्दे मातरम् ’ को बंगाली शैली में लय और संगीत के साथ कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया। अधिवेशन के अध्यक्ष रहीम तुल्ला सयानी थे । एवं यह कांग्रेस का बारहवाँ अधिवेशन था ।
  • मूलरूप से ‘ वन्दे मातरम् ’ के प्रारंभिक दो पद संस्कृत में थे, जबकि शेष गीत बांग्ला भाषा में।
  • जब (‘वन्दे मातरम्’ ) राष्ट्रगीत गाया या बजाया जाता है तो श्रोताओं को सावधान की मुद्रा में खड़े रहना चाहिए।
  • राष्ट्रगीत गाने की अवधि 65 सेकंड निर्धारित है ।
  • सर्वप्रथम जनवरी 1882 में बंकिम चन्‍द्र चटर्जी  द्वारा रचित ‘आनंदमठ ’ नामक उपन्यास  में राष्ट्रगीत का प्रकाशन किया गया ।
  • राष्ट्रगीत का अंग्रेजी में अरविन्द घोष ने अनुवाद किया गया ।
  • आरिफ मोहम्मद खान द्वारा राष्ट्रगीत का उर्दू मेंअनुवाद किया गया ।
  • बंग भंग आंदोलन के समय  ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय नारा बना।
  • संगीत निकेतन के  संस्थापक ओमकारनाथ ठाकुर ने सर्वप्रथम राष्ट्रगीत का गायन किया ये ग्वालियर घराने से सम्बंधित थे ,इस गीत की धुन जदुनाथ भट्टाचार्य ने बनाई थी ।
  • संसद के अधिवेशन का प्रारंभ राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत से होता है ।
  • वन्दे मातरम् किसी देवी देवता की वंदना न होकर भारत माता के प्रति अपनी भावनाओं का प्रकटीकरण है  इसलिए हमें ऐसे किसी नकली भ्रम से बाहर निकलकर इसके गौरवशाली इतिहास पर गर्व करते हुए इसका यथोचित सम्मान करना चाहिए ।