अधिगम एवं अभिप्रेरणा (Learning and Motivation)

अधिगम एवं अभिप्रेरणा (Learning and Motivation):-

अधिगम क्या है ? what is Learning?

अधिगम शब्द जर्मन भाषा के शब्द ‘Lernen’ से बना है इसे अंग्रेजी भाषा में ‘Learning’ कहते हैं  अधिगम का सरल अर्थ होता है सीखना । जिस प्रकार विकास एक जीवनपर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है। ठीक उसी प्रकार अधिगम भी जीवनपर्यंत चलने वाली एक सार्वभौमिक प्रक्रिया है । मानव जन्म लेने के पश्चात हर पल कुछ न कुछ सीखता रहता है । वास्तव में मनुष्य अपने को वातावरण से समायोजित करने का प्रयत्न करता है । और यही समायोजन उसे कुछ नए अनुभव देता है । जिसका प्रयोग मनुष्य आने वाली समस्याओं को हल करने में उपयोग कर सकता है । इस प्रक्रिया को मनोविज्ञान में अधिगम या सीखना कहते हैं ।

अधिगम या सीखने के लिए किसी स्थान विशेष या परिस्थिति विशेष की आवश्यकता नहीं होती । परन्तु  परिस्थिति और आवश्यकता के अनुसार सीखने की गति अवश्य घटती बढ़ती रहती है ।आपने अक्सर अनुभव किया होगा की यदि आप कोई कार्य अपने पूर्ण मन से स्वयम ही सीखना चाहते हैं, तो आपको वह सीखने में अपेक्षाकृत आसानी होती है ।

जिस व्यक्ति में सीखने की इक्षाशक्ति जितनी अधिक होती है, उतना ही अधिक वह अपने जीवन का विकास कर सकता है। अधिगम अर्थात सीखने की प्रक्रिया में व्यक्ति अनेक क्रियाऐं एवं उपक्रियाऐं करता है। अतः यह कहना सर्वथा सत्य है कि , सीखना किसी स्थिति के प्रति सक्रिय प्रतिक्रिया है।

उदाहरण के लिए यदि एक छोटे से बालक के सामने जलता हुआ दीपक लाया जाए तो वह अवस्य ही कौतूहलवश दीपक की लौ पकड़ने का प्रयास करता है । और यदि इस प्रयास में उसका हाथ जल जाए तो  वह अपने हाथ को पीछे खींच लेता है । एवं पुनः कभी उसके सामने दीपक लाया जाता है, तो वह अपने पूर्व अनुभव के आधार पर दीपक की लौ पकड़ने के लिए, हाथ नहीं बढ़ाता है, अपितु वह उससे दूर हो जाता है । इसी विचार को स्थिति के प्रति प्रतिक्रिया कहते हैं। अन्य सरल शब्दों में हम कह सकते हैं कि अनुभव के आधार पर बालक के स्वाभाविक व्यवहार में परिवर्तन हो जाता है। अधिगम का सर्वोत्तम सोपान अभिप्रेरणा ही है

अधिगम की मनोवैज्ञानिकों द्वारा डी गईं कुछ पारिभाषाएँ –

‘‘सीखना या अधिगम विकास की प्रक्रिया है।’’वुडवर्थ 
‘‘अधिगम या सीखना व्यवहार में उत्तरोत्तर सामंजस्य की प्रक्रिया है।’’B.F.स्किनर 
‘‘व्यवहार के कारण, व्यवहार में परिवर्तन ही सीखना या अधिगम कहलाता है।’’जे॰पी॰ गिलर्फड 
‘‘पहले से निर्मित व्यवहार में अनुभवों द्वारा हुए परिवर्तन को अधिगम या सीखना कहते हैं।“  कालविन 
“आदतों ज्ञान तथा अभिवृत्तियों का अर्जन ही अधिगम या सीखना कहलाता है । “क्रो एंड क्रो
“प्रगतिशील व्यवहार के व्यवस्थापन की प्रक्रिया को सीखना कहते हैं ।”स्कीनर

अधिगम के बारे में कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य :-

अधिगम से व्यवहार में परिवर्तन होता है
अधिगम निष्पादन से भिन्न होता है
अधिगम में व्यवहार में तुलनात्मक रूप से स्थाई परिवर्तन होता है
व्यवहार , ज्ञान और कौशल पर स्थायी प्रभाव ही अधिगम है
अधिगम समायोजन है
अधिगम सार्वभौमिक है
व्यवहार में परिवर्तन अभ्यास या अनुभूति के फलस्वरूप होता है
अधिगम विकासात्मक प्रक्रिया है
अधिगम जीवनपर्यंत चलने वाली एक सार्वभौमिक प्रक्रिया है ।
अधिगम व्यक्तिगत भी है और सामाजिक भी
अधिगम के लिए किसी विशेष समय, स्थान या परिस्थिति की आवश्यकता नहीं होती है
अधिगम से ही व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होता है
अधिगम का एक उद्देश्य और लक्ष्य अवश्य ही होता है

अधिगम एवं अभिप्रेरणा (Learning and Motivation)

अभिप्रेरणा क्या है ? What is Motivation ?

अभिप्रेरणा शब्द लैटिन भाषा के शब्द Motum या Movere शब्द से बना है । इसे अंग्रेजी भाषा में ‘Motivation’ कहते हैं ।‘Motivation’ शब्द जिसका अर्थ मूव (Move) या इन्साइट टू ऐक्सन (Insight to Action) होता है। 

 अभिप्रेरणा एक ऐसी मानसिक शक्ति है ,जो हमें अन्दर से ही किसी कार्य को करने के लिए सदैव प्रेरित करती रहती है । जब तक की हमें उस लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाये  ।

उदाहरण के लिए – विद्यार्थी जानते हैं की आजकल नौकरी इत्यादि में हद से ज्यादा काम्पटीशन है परन्तु वह अपनी इस कठिन लक्ष्य प्राप्ति के लिए दिन रात पढाई करता है । वह अगर असफल हो भी जाए तब भी प्रयत्न करना नहीं छोड़ता  । इस व्यवहार के कई कारण हो सकते हैं  ।जैसे उसकी सुनहरे भविष्य की कामना या माता-पिता को प्रसन्न करने की इक्षा इत्यादि । और यही अभिप्रेरणा उसे ऐसा कार्य करने के लिए प्रेरित करती है  ।

अभिप्रेरणा के सम्बन्ध में स्कीनर ने कहा है – “अभिप्रेरणा अधिगम का सर्वोत्तम राजपथ है  ।”

एवं गुड के अनुसार- “अभिप्रेरणा किसी कार्य को आरम्भ करने, जारी रखने और नियमित बनाने की प्रक्रिया है।”

एवं जॉनसन के अनुसार –“अभिप्रेरणा सामान्य क्रियाकलापों का प्रभाव है जो प्राणी के व्यवहार को इंगित और निर्देशित करता है।”

अभिप्रेरणा के बारे में कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य :-

आवश्यकता ,प्रणोद और प्रोत्साहन अभिप्रेरणा के मूल तत्व हैं ।
अभिप्रेरणा को सीखने का ह्रदय ,सीखने का स्वर्ण पथ भी कहा जाता है ।
अभिप्रेरणा को सीखने का मुख्य कारक और सीखने की अनिवार्य स्थिति भी कहते हैं
अभिप्रेरणा का तात्पर्य सीखने के जीवित प्रयास से भी है ।
अभिप्रेरणा व्यवहार को अर्जित करती है और इसे बनाये रखने में सहायक होती है ।
यह व्यवहार को निर्देशित ,चयनित नियमित और लक्ष्योन्मुख भी करने के लिए उत्तरदायी होती है ।
लक्ष्य केन्द्रित व्यवहार अभिप्रेरणा का ही परिणाम होता है ।
आवश्यकता —-प्रणोद —- प्रोत्साहन  ,यह अभिप्रेरणा से संबंधित सही क्रम है  ।

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April 10, 2020

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